जूना अखाड़ा ने कुंभ मेले में अपनी भागीदारी समाप्त करने की घोषणा की

देश में साधुओं के 13 प्रमुख अखाड़ों में से एक जूना अखाड़े ने शनिवार को हरिद्वार कुंभ से अपनी भागीदारी समाप्त करने की घोषणा कर दी।

जूना अखाड़ा ने यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के कुछ घंटों बाद लिया जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर हरिद्वार में चल रहे कुंभ में हिस्सेदारी को सांकेतिक रखने को कहा था।

जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने ट्वीट किया, ‘‘ भारत की जनता व उसकी जीवन रक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए हमने विधिवत कुंभ के आवाहित समस्त देवताओं का विसर्जन कर दिया है। #जूना अखाड़ा की ओर से यह कुंभ का विधिवत विसर्जन-समापन है।’’

उन्होंने इसके साथ ही फैसले की प्रति भी साझा की जिसपर उनके, जूना अखाड़े के संरक्षक हरि गिरि, सचिवों-महंत मोहन भारत व महंत महेश पुरी के हस्ताक्षर हैं।

फैसले में कहा गया है कि कुंभ के सभी आवाहित देवताओं का विसर्जन अखाड़े के संतों के साथ परामर्श के बाद जनहित में किया गया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘देवताओं के विसर्जन के साथ हम सभी तीर्थों और सिद्धपीठों से भी प्रार्थना करते हैं कि वे हरिद्वार कुंभ मेला 2021 को विसर्जित-समापन घोषित करें।’’

हरिद्वार में चल रहा कुंभ मेला विवाद के केंद्र में आ गया क्योंकि देश में कोरोना वायरस महामारी की बेलगाम दूसरी लहर के बीच आशंका जताई जा रही थी कि लाखों श्रद्धालुओं के जमा होने से आयोजन संक्रमण फैलाने वाला साबित हो सकता है।

इससे पहले जूना अखाड़े के प्रमुख ने कोविड-19 मामलों में वृद्धि के मद्देनजर लोगों से अपील की थी कि हरिद्वार कुंभ में वे सीमित संख्या में आएं।

उन्होंने कहा कि आस्था बड़ी चीज है लेकिन मानव जीवन अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने हरिद्वार में पत्रकारों से कहा, ‘‘हमें यह एहसास है कि कोरोना वायरस इससे पहले इतना अधिक आक्रामक और प्राणघातक नहीं था। इसलिए मेरी श्रद्धालुओं से भावनात्मक अपील है कि वे सीमित संख्या में ही कुंभ में शामिल हों।’’

सबसे पुराने अखाड़ों में से एक के महामंडलेश्वर ने साधुओं से भी अपील की कि वे जीवन बचाने के लिए कार्यक्रम में हिस्सेदारी सांकेतिक ही रखें।

उन्होंने खासतौर पर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मेले में नहीं आने और सुरक्षित रहने की सलाह दी थी।

गिरि ने रेखांकित किया था कि कुंभ मेला पहले ही समाप्ति की ओर है, दो प्रमुख शाही स्नान संपन्न हो गए हैं और एक बाकी है जिसमें अधिकतर वैरागी साधु शामिल होते हैं और अन्य अखाड़ों का केवल सांकेतिक प्रतिनिधित्व होता है।’’

गिरि ने कहा, ‘‘बैरागी साधु अपना शाही स्नान करेंगे। प्रशासन इसे आयोजित करने को लेकर प्रतिबद्ध है लेकिन मेरी व्यक्तिगत अपील है कि मानवता के लिए इसे सांकेतिक रखना चाहिए।’’

गिरि ने निरंजनी अखाड़े की हालिया घोषणा का बचाव किया था जिसमें कहा गया था कि उनके लिए कुंभ संपन्न हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘…दरअसल उनका कहना था कि दो प्रमुख शाही स्नान संपन्न हो गए हैं और एक बाकी है जिसमें अधिकतर वैरागी साधु शामिल होते हैं और अन्य अखाड़ों का केवल सांकेतिक प्रतिनिधित्व होता है।’’

जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर ने जोर देकर कहा कि उनके अखाड़े के साधु कोविड-19 के सभी नियमों का अनुपालन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे अखाड़े के साधुओं की सबसे अधिक बार कोविड-19 जांच की गई जिनमें से एक या दो संक्रमित पाए गए। खुद मेरी 12 बार कोविड-19 जांच हुई है।’’

उल्लेखनीय है कि 10 से 14 अप्रैल के बीच हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में 1,701 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है और आशंका है कि लोगों की भीड़ से संक्रमण के मामलों में और तेजी से वृद्धि होगी।

कुंभ के दौरान 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या पर और 14 अप्रैल को मेष संक्राति पर दो शाही स्नान हुए जिनमें कुल 48.51 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था और उन्हें खुले तौर पर मास्क और सामाजिक दूरी के नियम का उल्लंघन करते हुए देखा गया।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि पिछले हफ्ते कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे और ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती किया गया था।

वहीं, निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कपिल देव की मृत्यु 13 अप्रैल को कोविड-19 इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में हो गई।

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