मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से हो सकती है ये 5 बीमारियां: तीसरी बीमारी सुनकर चौंक जाएंगे आप !

कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान लोगों का ज्यादातर समय मोबाइल फोन पर गुजरा। मोबाइल का बेहिसाब इस्तेमाल करने पर कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। कई वैज्ञानिक शोध में ये बात सामने आई है कि मोबाइल का अत्याधिक इस्तेमाल करने पर गंभीर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बीमारियां हो सकती हैं।


आइए नजर डालते हैं की मोबाइल यूजर्स को कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं।

डिप्रेशन : मोबाइल फोन का अत्याधिक इस्तेमाल हमारे नर्वस सिस्टम पर बुरा असर डालता है। इससे सिर में दर्द, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत, अत्याधिक गुस्सा आना, नींद ना आना और डिप्रेशन जैसी बीमारियां हो सकती हैं।


माइग्रेन: मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने से आप माइग्रेन का शिकार भी हो सकते हैं। मोबाइल आपको असहनीय सिर दर्द दे सकता है। इससे माइग्रेन अटैक भी आ सकता है और आप कई दिनों तक से दर्द से परेशान रह सकते हैं।

ब्रेन कैंसर : मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से ब्रेन कैंसर का खतरा 50% तक बढ़ जाता है। कान पर मोबाइल लगाने की वजह से हमारे दिमाग तक रेडियो वेव पहुंचती हैं। एक अनुमान के मुताबिक फोन पर बात करने के दौरान हर मिनट हमारे दिमाग तक 220 इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इम्पल्सेस पहुंचती हैं। ये इंपल्सेस सीधे तौर पर तो हानिकारक नहीं होती हैं लेकिन लंबी अवधि में हमारे दिमाग की कोशिकाओं पर इनका बुरा असर पड़ता है।

दृष्टि रोग: घंटो तक मोबाइल पर इंटरनेट सर्फिंग करने और गेम्स खेलने की वजह से आंखों पर बुरा असर पड़ता है। कम उम्र में अत्याधिक स्क्रीन देखने से रेटीना और आंखों की नसों को क्षति पहुंच सकती है। इससे आंखों में खुजली, आंसू आना, सूखापन, जलन और आंखों लाल हो सकती हैं। मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोग बुढ़ापे में मोतियाबिंद और अंधेपन का शिकार भी हो सकते हैं।

कान रोग: घंटो तक फोन पर बात करने वाले लोगों को बहरापन या टिनिटस बीमारी हो सकती है। टिनिटस बीमारी में कानों में आवाज गूंजती है और कम सुनाई देती है। कान के अंदरुनी भाग के क्षतिग्रस्त होने से ऑडिटरी सिस्टम द्वारा साउंड सिंग्नल का न्यूरल सर्किट संतुलन बिगड़ जाता है और इससे भी कान में आवाज आने की समस्या हो सकती है।

इन सभी बीमारियों से बचने के लिए कुछ आसान सावधानियां है जिनका पालन करके आप अपने आपको सुरक्षित रख सकते हैं।

  1. मोबाइल फोन को शरीर से दूर रखें। आपको कोशिश करनी चाहिए कि मोबाइल का शरीर से कम संपर्क हो। पैंट की जेब में मोबाइल रखने से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ सकता है। मोबाइल को जेब के बजाय किसी बैग में रखें।
  1. मोबाइल पर बात करने के बजाय लैंडलाइन फोन का ज्यादा इस्तेमाल करें। मोबाइल को डेस्क पर रखें और बात करने के लिए लैंडलाइन का इस्तेमाल करें। मोबाइल का इस्तेमाल घर या ऑफिस से बाहर होने पर ही करें।
  2. सोने से पहले मोबाइल को अपने सिर से दूर रखें। इससे मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन से आप सुरक्षित रह सकते हैं। रात के समय मोबाइल को स्विच ऑफ कर दें तो और बेहतर होगा ।
  3. मोबाइल पर सीधे बात करने के बजाए हैंडस-फ्री स्पीकर और ईयर फोन का इस्तेमाल करें। इससे आप मोबाइल की शरीर से दूरी सुनिश्चित कर पाएंगे।
  4. छोटी-छोटी बात पर फोन कॉल करने से बेहतर है SMS या व्हाट्सएप मैसेज करें। इससे आपकी मोबाइल फोन कॉल्स में 10% तक कमी आ सकती है मोबाइल को चार्ज करने के दौरान फोन पर बात ना करें क्योंकि इस दौरान मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन का लेवल 10 गुना तक बढ़ जाता है।
    मोबाइल फोन का सिग्नल कमजोर होने पर मोबाइल को चेहरे पर ज्यादा दबाकर बात ना करें। बैटरी कम होने पर भी ज्यादा बात ना करें इससे रेडिएशन बढ़ता है। इन सावधानियों को अपनाकर आप मोबाइल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं और सुरक्षित भी रह सकते हैं। मोबाइल जैसी तमाम वैज्ञानिक खोजें हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए हैं, ना कि हमें बीमार बनाने के लिए हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल उचित सीमा में करें।

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